All India News

‘अपनी नजर से’ का नया ठिकाना, लेकिन तेवर वही पुराना

“नवभारत टाइम्स” में सालोंसाल तक आप सभी प्रबुद्ध पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा साप्ताहिक कॉलम ‘अपनी नजर से’ वही खरी-खरी, वही निष्पक्ष नजरिया, वही पुराना तेवर….और वही आग उगलती सच्चाई लेकर आज से फिर आप सभी से रूबरू है. दुनिया को बिना कोई चश्मा लगाए देखने और बिना किसी छेड़छाड़ के सबके सामने ले जाने का वही जज्बा बरकरार रखने का आपसे वादा है. पहले भी ‘कोऊ हो नृप हमें का हानि’ का रवैया और रुख था तथा आगे हमेशा यही रहेगा. थोड़े से अन्तराल के बाद अपने मुरीदों की फौज के बीच आया ‘अपनी नजर से’ कॉलम अब AllindiaNews.com पर नियमित रूप से सबके बीच होगा.

“नवभारत टाइम्स” से AllindiaNews.com तक के सफर में कई राष्ट्रीय पत्र -पत्रिकाओं और वेब-पोर्टल के ऑफर आए जो इस कॉलम को स्थान देना चाह रहे थे लेकिन यह भी अकाट्य सत्य है कि जब तक स्तरीय ज्ञानी और कद्रदान नां हों तो तान छेड़ना कला की तौहीन ही होती है, वही इस कॉलम के साथ हुआ. इस दौरान इन पंक्तियों के हजारों प्रबुद्ध प्रशंसकों, चहेतों और मित्रों ने इस कॉलम के लिए जिस तरह आग्रह, मनुहार और नाराजगी की हद तक का प्यार उड़ेंला, उससे अभिभूत हूँ. उसी का नतीजा है कि आज नए स्वरूप में आप सभी के बीच हमेशा के लिए आ गए हैं. इस अर्से में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, महाराष्ट्रीय और मुम्बइया स्तर पर नैतिक, राजनीतिक और सामाजिक उथलपुथल का एक लंबा दौर गुजरा. बहुत कुछ बदला, कुछ जबरन बदला गया और कुछ को बदलने के लिए मजबूर किया गया. कुछ राजनीतिक दलों ने चोला बदला तो कुछ राजनीतिज्ञ सियारों का अस्सल रंग सच्चाई का पानी गिरते ही सबके सामने आ गया.

    पिछले कुछ साल में पार्टियों और राजनेताओं का टॉलरेंस लेवल बेहद कम हो गया है, विशेषकर पत्रकारिता जगत से. ये सभी रंच मात्र की आलोचना सुनने को तैयार नहीं. इन सभी को अपने इर्दगिर्द भांड और चारण चाहिए, प्रलोभनों में फंस जानेवाले चाहिए और हर हां में हां मिलानेवाले चाहिए (जो इफरात मात्रा में मिल जा रहे हैं). जबकि कुछ दशक पहले तक ऐसा नहीं था. यह बात तो सदियों पहले तुलसीदास लिख गए हैं कि ‘निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय’, आलोचक तो आपके लिए पथ प्रदर्शक का काम करता है और राह में आनेवाले कंकड़ों से आपको आगाह करता है. यह बात दीगर है कि इस बदतर स्थिति के लिए ये भांडों की फौज कम जिम्मेदार नहीं, विशेषकर टीवी मीडिया के लोगों ने तो अति कर दी है. 

अर्णब और उनके जमूरों ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए जिस तरह की चिल्ल-पों और उछलकूद का ड्रामा पिछले दिनों से मचा रखा है उससे आम जनता को क्या मिला? उधर अर्णब जेल से निकलकर शहीद भगतसिंह की तरह प्रोजेक्ट कर पब्लिसिटी लूटना चाहते हैं, लेकिन सच तो ये है कि उनकी इन्हीं हरकतों की वजह से लोगों ने टीवी देखना बंद कर दिया है. मैं ऐसे सैकड़ों दोस्तों को जानता हूँ जिन्होंने पहले न्यूज चैनल देखने बंद किए और अब तो कई दिनों तक उनके घर में टीवी नहीं खुलते. उसकी जगह Netflix, Amezon Prime, Hotstar, SonyLiv जैसे OTT और वेब मीडिया जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्मों ने ले ली है. पाठकों की इस असमय बेरुखी के लिए भक्त बन चुके भांड और अर्णब जैसे चारण जिम्मेदार हैं.

सोनिया-राहुल आज उसी नीरो की मानिंद हो गए हैं जो रोम को जलता देखकर भी बांसुरी बजाने में मशगूल था. यह अजीब विडंबना है कि ये दोनों कांग्रेस के नहीं बल्कि उस रीढ़विहीन विपक्ष के प्रतीक हैं जिसकी वजह से देशभर में हर विरोध गूंगा हो चुका है. पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बनी राजमाता इससे कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूरे विपक्ष को घुटने पर ला चुकी हैं. शिरोमणि अकाली दल हो या शिवसेना, समाजवादी पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस हो या तृणमूल कांग्रेस इन सबकी विवशता देखते ही बन रही है। मां-पुत्र की यह जोड़ी विवशता की प्रतीक बन गई है. इसी का फायदा मोटाभाई जमकर उठा रहे हैं. उधर अमेरिका में अपना स्वागत कराने के चक्कर में (या गुजराती भाषी अमेरिकियों के वोट की लॉबिंग के लिए) ट्रंप भाई फूहड़ता का प्रदर्शन करते हुए भारत को कोरोना का उपहार तो दिलवा गए लेकिन फिर भी बाइडेन ने उन्हें दक्षिण भारतीय-अमेरिकियों के वोट से चित्त कर दिया। 

चलते-चलाते

बिहार के हालिया चुनाव परिणाम के बाद नीतीश कुमार की स्थिति तमाशा दिखानेवाले उस नखविहीन पालतू रीछ जैसी हो गई है जो सच्चाई से दूर हमलावर रूप दिखाते हुए हंसी का पात्र बना हुआ है. बीजेपी ने उन्हें पासवानी दाव खेलकर चुनाव में पहले ही नाथ दिया है और अब उनके सामने पूंछ हिलाने के अलावा और कोई चारा ही नहीं बचा. भले ही लोग उनके सामने बीजेपी के बदले आरजेडी का विकल्प सुझाएँ पर उन्हें भान है कि वहां तो उनकी स्थिति और बदतर हो जाएगी, इसलिए उनके सामने हालात से समझौता करने के अलावा और कोउ ठौर नहीं दिखता।

Related Articles

6 Comments

  • Anil Pathak , 14/11/2020 @ 8:32 pm

    Satishji… MERI HARDIK SHUBHKAMNAY…SIR You are the most versatile … BEBAAK..unbiased journalist…very few of your like are left in todays biased..TRP oriented journalism. I am very happy now ..shall be getting your write ups…🙏💐

  • Arti Trivedi , 14/11/2020 @ 11:07 pm

    As always you write every article passionately!!!

  • Sanjay Trivedi , 15/11/2020 @ 2:05 pm

    भाईसाहब बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं आपके इस नए वेबसाइट के लिए।
    “अपनी नज़र से” कॉलोम को दुबारा शुरू करके आपने अपने बेबाक लेखन को फिर पढ़ने का मौका दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *