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अभिभावक की रजामंदी बिना शादी करनेवाली लड़कियों की आयुसीमा 21 वर्ष हो

लोकसभा में प्राइवेट बिल के जरिए क्रांतिकारी प्रस्ताव रखनेवाले सांसद गोपाल शेट्टी से साक्षात्कार

एक नजर में : गोपाल चिनैया शेट्टी

* जन्मदिन : 31 जनवरी, 1954               जन्मस्थान : मुंबई

* 1992 से मुंबई महानगर पालिका में तीन बार नगरसेवक का चुनाव जीता

* महाराष्ट्र विधानसभा में दो बार बोरिवली से विधायक

* उत्तर मुंबई लोकसभा से 2014 और 2019 में दोनों बार साढ़े चार लाख मतों से प्रचंड विजय

* संसद में वित्त, रेलवे सहित कई संसदीय कमेटियों में स्थान

* मुंबई की ट्रेन, ट्रैफिक और झोपडपट्टी समस्याओं को दिल्ली तक उठानेवाली सबसे बुलंद आवाज

जमीनी स्तर पर आम जनता से जुड़कर निरंतर काम करनेवाले जनप्रतिनिधि को जनता किस तरह वोट नामक आशीर्वाद देकर सिर आंखों पर बिठाती है इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं उत्तर मुंबई के लोकसभा सांसद गोपाल शेट्टी. 15 साल तक नगरसेवक (तीन टर्म), दस साल तक विधायक (दो टर्म) और दो बार सांसद (6 वर्ष, दूसरा टर्म जारी) के रूप में चुने गए गोपाल शेट्टी का चुनाव क्षेत्र पूरी तरह से गुजराती बहुल रहा है, दूसरे नंबर पर मराठी वोटर हैं और अगर राज्य विशेष के चश्मे से देखें तो उनके मूल राज्य कर्नाटक के वोटरों की संख्या तो शायद दो प्रतिशत भी न हो लेकिन वे भारत के उन गिने चुने जनप्रतिनिधि हैं जो लगातार दो-दो चुनाव साढ़े चार लाख से अधिक वोटों से जीते हैं. उन्हें ‘कर्मवीर’ गोपाल शेट्टी इसीलिए कहा जाता है क्योंकि मतदाताओं के साथ अपने लाइव कॉन्टेक्ट की वजह से वे उनके परिवार के हिस्से बन चुके हैं. उनके दरवाजे हमेशा लोगों के लिए खुले होते हैं और बुलाने पर वे खुद भी पहुंच जाते हैं. इस समय उनका क्रांतिकारी प्राइवेट मेंबर बिल लोकसभा के पटल पर है जिसको लेकर हर ओर चर्चा है. उनके इस कदम को भारी लोक समर्थन मिल रहा है जिसमें प्रस्ताव है कि अभिभावक की रजामंदी के बिना शादी करनेवाली लड़कियों की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए. तेजतर्रार सांसद गोपाल शेट्टी ने पिछले दिनों दै. ‘आज का आनंद’ के लिए प्रतिनिधि सतीश मिश्र से विस्तार से बातचीत की. पेश हैं उस विशेष मुलाकात के मुख्य अंश:

अगर मां-बाप की सहमति से लड़कियों की शादी 18 साल में होती है तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए लेकिन लवजेहाद के दौर में देखा जा रहा है कि 16 साल की लड़कियों को लड़के बरगलाकर दो साल उलझाए रखते हैं और 18 वर्ष की उम्र होते ही उन्हें शादी की जकड़ में कैद कर दिया जाता है. नारी मुक्ति के दौर में वैसे भी संजीदा लड़कियां खुद 25 साल के आसपास शादी करना पसंद करती हैं और 21 साल की उम्र में ही जाकर परिपक्व और सही फैसला लेने में सक्षम बनती हैं. मैंने आम लोगों की राय ली है और 90% लोग इस पक्ष में दिखे हैं.   

इन दिनों आपके द्वारा संसद में रखे गए प्राइवेट मेंबर बिल की काफी चर्चा है ?

गोपाल शेट्टी : अपने देश में कानूनी रूप से विवाह करने की उम्र 18 है लेकिन यह अक्सर देखा गया है कि 15-16 साल की लड़कियां रोमियो छाप लड़कों (जिसमें लवजेहाद करनेवाले सुनियोजित गुट भी सक्रिय हैं) के प्रेम चक्कर में पड़ जाती हैं. वे 18 साल की भी नहीं हुई होतीं और प्यार-मोहब्बत की उसी धुन में मां-पिता की इच्छा के विपरीत शादी का फैसला कर लेती हैं. इस प्राइवेट मेंबर्स बिल के जरिए यही सोच है कि वे यह निर्णायक फैसला 21 वर्ष की उम्र में परिपक्व दिमाग से सोचने के बाद ही लें. अगर वे अभिभावक की इच्छा से 18 साल में भी शादी करें तो किसी को कोई आपत्ति नहीं है. इस बिल में यही प्रावधान है कि अगर बच्ची माता-पिता भाई-बहन और अपने समाज के खिलाफ जाकर विवाह बंधन में बनने जा रही है तो उसका फैसला किसी से प्रभावित हुआ ना हो. इसलिए सभी का यही मानना है कि विद्रोह की स्थिति में विवाह की उम्र 21 की होनी चाहिए. मैंने यह प्रस्ताव लाखों लोगों की सलाह और उनसे विस्तृत मशविरे के बाद पेश किया है जिन्होंने सराहते हुए इसका पूर्ण समर्थन किया है। सभी मानते हैं कि इस एक संशोधन से लाखों-करोड़ों लड़कियों का जीवन बर्बाद होने से बच जाएगा. अगर यह प्रस्ताव कानून की शक्ल ले लेता है तो यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी सफलता होगी और यह अब तक सात चुनाव जीतने से ज्यादा बड़ी उपलब्धि मानूंगा. 

आपकी सहयोगी शिवसेना ने क्यों महाराष्ट्र में बीजेपी को त्यागकर कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बना ली ?

गोपाल शेट्टी : यही शिवसेना पार्टी जब हमारे साथ सत्ता में थी तब हर दिन किसानों के हित की बातें करते हुए नए-नए मसले सामने लेकर आ रही थी लेकिन आज इतने महीनों बाद भी इसी सरकार ने किसानों के लिए न कोई योजना पेश की है और ना ही उनके लिए कोई कदम उठाए हैं. वर्ना तो राजू शेट्टी और उनके दूसरे समर्थक दल हर दूसरे दिन बड़े-बड़े वक्तव्य देते थे, अब तो सब दुबक कर बैठे हुए हैं। ऐसा लग रहा है मानो किसानों की कोई समस्या ही नहीं बची।

संसद की समितियों में आपके सुझाव काफी सुर्खियां बटोरते रहते हैं ?

गोपाल शेट्टी : पिछली बार के टर्म में मैं वित्त और टेक्सटाइल दोनों विभागों की संसदीय समितियों में था और जमकर काम भी किया। इस बार मुझे फिर से वित्त समिति के अलावा रेलवे समिति में भी रखा गया है. वित्त समिति में रहते हुए यह मेरा ही सुझाव था जिसे अमल में लाते हुए अब बैंक के खाता धारकों को बैंक में गड़बड़ी होने या दिवालिया होने पर पहले के एक लाख रूपए के बदले कम से कम  पांच लाख रूपए की रकम मिलेंगे ही. वर्ना तो बैंकों पहले ही साफ कह रखा था कि वे ऐसी स्थिति में केवल एक लाख रूपए ही देंगे जोकि उनके साथ सरासर अन्याय था. मेरे सुझाव के बाद सरकार ने उस पर कार्रवाई करते हुए वह पांच गुना बढ़ाकर उनमें विश्वास का संचार किया है. इसी तरह मैंने वित्त समिति में सुझाव रखा था कि पूरे देश में पोंजी स्कीम्स के जरिए जिस तरह लोगों की लूटखसोट हो रही है उस पर सरकार ही कदम उठाते हुए लगाम लगाए. उसी के मुताबिक अब नियमों को इतना कसा गया है कि प्रतिबंध लगाने से लेकर संबंधित हर किसी को लंबी सजा का प्रावधान है. अब मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसे घोटाले बाजों को कतई बख्शा नहीं जाएगा. इस सरकार ने करोड़ों जनधन खाते खुलवाकर गांवों और गृहिणियों द्वारा डिब्बों में छिपा कर रखे जानेवाले पैसे को बैंकों तक पहुंचाकर एक लाख करोड़ रूपए रोलिंग में ला दिया. बैंक में नए खाते खुलने से वे पैसे सुरक्षित तो हैं ही वे देश के निर्माण में भी काम आ रहे हैं.

स्कील डेवलपमेंट पर क्या सही तरीके से जोर दिया जा रहा है ?

गोपाल शेट्टी : स्किल डेवलपमेंट पर अधिक जोर देने की इस समय सबसे अधिक जरूरत है. यह बात सही है कि ‘मेक इन इंडिया’ को भारी समर्थन मिल रहा है लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ का असली लाभ तभी आम लोगों तक पहुंच पाएगा जब लोग स्किल्ड होंगे. जब खुद लोगों के पास इतनी क्षमता होगी कि सब कुछ अपने हाथों कर पाएंगे. इसलिए जरूरी है कि लोग अपने अपने क्षेत्र की निपुणता हासिल करें. मेरी तो कोशिश होगी कि इसे स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जा सके क्योंकि आज बच्चों को स्किल डेवलपमेंट कराना सबसे ज्यादा फायदेमंद है. बनिस्बत यह जानने से कि बाबर के वंशज कौन-कौन रहे या कौन कब मरा, कब जिया, किसकी कितनी पत्नियां थी और अकबर बादशाह का बेटा कौन था? लोगों के भावी जीवन में यह जानकारी कितना मायने रखती है जबकि इससे किसी को मतलब नहीं होता.

आपकी नजर में मोदी सरकार का वर्तमान आम बजट कैसा है ?

गोपाल शेट्टी : यह बजट ‘सबका साथ सबका विकास’ का सबसे बड़ा प्रमाण है जिसमें निम्न वर्ग से लेकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग तक का बेहतरीन तरीके से ख्याल रखा गया है और उन्हें किसी न किसी तरीके से लाभ पहुंचा है. इससे उन्हें बेहतर तरीके से अपना कार्य करने का अवसर मिल सकेगा. किसानों के लिए अधिक कर्ज की व्यवस्था की गई है तो व्यापारियों के लिए पैसा रोलिंग में रखने का इंतजाम किया गया है. अब पैसा मार्केट में सर्कुलेट लेट होगा तो उसका फायदा हर वर्ग और तबके को होगा. यह फायदा दिखाई देगा. किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं बनाकर उन्हें टैक्स बेनिफिट दिया गया है. उन्हें बैंक का कर्ज समय पर मिले उसका इंतजाम इस बजट में है. सैलरी क्लास के लोगों के लिए आयकर के लाभ को और सरल किया गया है जिससे वे अपनी बचत कर सकें और पैसे को उपभोक्ता के रूप में लगाएं. बचत का पैसा वे फिर से लगा पाएंगे. भारत में सेव करने की जो प्रवृत्ति है उसका उदाहरण इतिहास रहा है. केरल की पद्मनाभ मंदिर का खजाना और 17 बार लूटे गए सोमनाथ मंदिर. यहां अकूत संपदा होने का कारण यही है कि लोगों ने पैसे को बचाए रखा लेकिन अब समय बदला है और जरूरत है कि पैसे को विनिमय किया जाए जिससे वह रोलिंग में आए और उसका फायदा सभी को मिल सके.

सीएए, एनसीआर और एनआरपी के बारे में आपके क्या ख्यालात हैं ?

गोपाल शेट्टी : लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और प्रेस दोनों की एक सामूहिक जिम्मेदारी है और शायद हम दोनों उसे निभाने में असफल रहे हैं जिस वजह से आम लोगों के बीच वर्तमान भ्रम फैला हुआ है. सीएए, एनसीआर और एनपीआर को लेकर लोग ना जाने किस प्रकार लोग विरोध का फैशन बनाए हुए हैं. अगर उन्हें इसकी सही जानकारी होगी और वे पहचाने तो जानेंगे कि यह उनके और देश के लिए एक फायदेमंद कदम है. यह तो सरकार का काम है कि वह आसाम की तरह हर देश के हर हिस्से के नागरिकों प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए. हमारे प्रधानमंत्री इस समय केवल उन्हीं कामों को पूरा करने में लगे हुए हैं जिसे 70 साल में कांग्रेस नहीं कर पाई थी या शुरू करने के बावजूद उसे अंजाम तक नहीं पहुंचा पाई थी. हमारे प्रधानमंत्री इन सारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को खत्म करते हुए, उसमें तेजी लाते हुए और सही तरीके से लागू कर रहे हैं जिससे उसका फायदा आम जन-जन तक पहुंच सके. वास्तव में तो इन कदमों के लिए कांग्रेस को खुद मोदी को बधाई देनी चाहिए कि वह उनके फाइलों में पड़े या आधे-अधूरे कामों को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं. जैसे असम का मामला ले लीजिए 1971 में कांग्रेस के ही प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वहां के छात्र यूनियन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें 1971 की कटऑफ डेट साफ रूप से लिखी गई थी. तब भी सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि एनसीआर तैयार किया जाए जिससे वहां के मूल नागरिकों और बाहरी लोगों की पहचान हो सके तथा अवैध रूप से आकर बसे लोगों को स्वदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू हो सके. लेकिन कांग्रेस ने यह काम पूरा नहीं किया और आज उसे जब मोदी जी पूरे करने जा रहे हैं तो कांग्रेस सहित संपूर्ण विपक्ष उनका विरोध कर रहा है.

कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर विपक्ष का विरोध कहां तक जायज है ?

गोपाल शेट्टी : स्वतंत्रता के बाद से ही भारत भर की यही मांग रही है कि एक देश में दो विधान, दो राष्ट्रध्वज और दो व्यवस्थाएं नहीं होनी चाहिए और मोदी जी ने इस दीर्घप्रतीक्षित डिमांड को कश्मीर से धारा 370 हटा कर पूरा दिया. अब बताइए आखिर इसका विरोध क्यों होना चाहिए. जहां तक धारा 370 खत्म करने और कश्मीर के कंधे पर हाथ रख कर उसे देश के साथ आगे बढ़ाने की बात है तो इस कदम का वहां का हर बच्चा बच्चा समर्थन कर रहा है. कश्मीर के लोग देश के साथ जोड़ने के लिए सदैव मोदी जी के ऋणी रहेंगे. पूरा देश कश्मीर वासियों को अब अपने साथ मानने लगा है. अब कश्मीरवासी भी देश भर में हासिल शिक्षा, नौकरी और रोजगार जैसी हर सुविधा और लाभ को पा सकेंगे. उन्होंने जो कुछ 70 सालों में गंवाया था, उसे वे नए सिरे से पा सकेंगे. अब उनका भी हर आरक्षण और न्याय पर उतना ही हक होगा जितना देश के हर क्षेत्र को लोगों को है. विपक्ष और विदेश के कुछ एजेंडा लेकर चलनेवाले भले ही आज विरोध कर रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि कश्मीर सहित देश और विदेश का हर व्यक्ति मोदी जी के इस कदम का स्वागत करता है. आने वाले समय में आप खुद देखेंगे कि वे कितनी बड़ी संख्या में मोदी के कदमों के साथ खड़े होते हैं. हां कुछ राजनीतिक दल इसलिए नाराज हैं क्योंकि उनकी दुकान बंद हो चुकी है.

मुंबई की लोकल में ऑटोमैटिक डोरक्लोजर का आपका  प्रस्ताव किस मुकाम तक पहुंचा है ?

गोपाल शेट्टी : मुंबई में लोकल ट्रेनों में ऑटोमैटिक डोरक्लोजर का प्रस्ताव मैं ही लेकर आया था क्योंकि मुंबई में हर वर्ष करीब तीन हजार लोग ट्रेन से गिरकर जान गंवाते हैं. लंबे समय तक पीछे लगने के बाद रेल मंत्रालय ने मेरे प्रस्ताव पर ट्रायल शुरू किया और अब इसे क्रियान्वित करने में आ रही बाधाओं को दूर कर अवश्य लागू किया जाएगा. कुछ समस्याएं और कुछ सुधारों की जरूरत है तो उसे दूर करने में हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियर खुद सक्षम हैं और वे इसका रास्ता भी निकालेंगे. दुनिया के हर देश में यह डोर क्लोजर स्कीम सफलता पूर्वक लागू है तो उसे यहां क्यों नहीं लगाया जा सकता? मैं इसे लागू होने तक इसके पीछे रहूंगा. इसकी एक वजह यह है कि मेरी उत्तरमुंबई की लोकसभा सीट के लोग कम ट्रेनों से सर्वाधिक परेशान हैं और वे ही इसके अधिक शिकार हो रहे हैं लेकिन इसे लागू करने पर इसका फायदा सभी को मिल सकेगा.

जनप्रतिनिधि के रूप में आप अब तक सात चुनाव और हर बार बढ़ी मार्जिन से कैसे जीतते रहे हैं ?

गोपाल शेट्टी : मैं सात बार जनप्रतिनिधि चुनने के लिए अपने उन मतदाताओं और उनके भरोसे का तहेदिल से शुक्रगुजार हूं. मैं उनका हमेशा ऋणी रहूंगा. उन्होंने मुझे तीन बार नगरसेवक के रूप में मुंबई महानगरपालिका में सेवा करने का मौका दिया और 1992 से शुरू हुई यह विशद यात्रा 2019 से आगे अब तक जारी है. मेरे तो कई ऐसे भी मतदाता हैं जिन्होंने 1992 में भी मुझे वोट दिया और 2019 में भी. उन्होंने दो बार विधायक और इसके बाद दो बार सांसद के रूप में चुनकर अपना प्यार लुटाया है. लेकिन अगर आप मुझसे काम के स्वरूप की बात करेंगे तो मुझे सबसे ज्यादा आनंद नगरसेवक की भूमिका में ही मिला क्योंकि वहां मैं लोगों की आम समस्याओं से रूबरू हुआ करता था. उनकी दैनिक समस्याओं को दूर करने में कुछ अलग ही आनंद था क्योंकि मैं उनके कंधे से कंधा मिलाकर काम करता था. उस संतोष की कोई बराबरी नहीं है. वैसे आज भी मैं उनकी उन समस्याओं का भी निपटारा करता हूं लेकिन अब काम का स्वरूप व्यापक हो गया है. नगरसेवक के रुप में मेरे पास जो लोग आते थे, वे आम और एकदम गरीब लोग होते हैं और सच कहें तो लोकतंत्र की सबसे ज्यादा जरूरत इन लोगों को होती है इसलिए मुझे उनके काम करने में अधिक आनंद आता है.

2014 में संजय निरूपम को हराने के बाद 2019 में तो आपकी जीत का अंतर और अधिक बढ़ गया ?

गोपाल शेट्टी : नगर सेवक के रूप में जो मैं तीन चुनाव इसलिए जीता क्योंकि मेरा आम लोगों से व्यक्तिगत संपर्क और कार्यकर्ताओं का सहयोग था जबकि जब मैं विधायक का चुनाव लड़ा तो मेरा मुकाबला मेरी ही पार्टी से तीन बार विधायक रहे लेकिन तब दलबदलू हुए ऐसे उम्मीदवार से था जो यहां के बहुसंख्यक वोटरों के वर्ग से आते थे. मैं ना तो गुजराती था और ना ही मेरी कोई विशेष व्यक्तिगत अपील थी, लेकिन लोगों ने मुझे अपने पलकों पर बिठाया और मुझे जोरदार विजय दिलाई. यह सबसे ज्यादा चैलेंजिंग था फिर भी मैं 52,000 वोट से जीता. पांचवा चुनाव विधानसभा आसानी से जीतने के बाद छठे चुनाव (लोकसभा) में मेरा सामना मुंबई कांग्रेस के धाकड़ अध्यक्ष से था, लेकिन यह लोगों का प्यार ही था कि मैं इतने विरोध के बावजूद साढ़े चार लाख वोट के अंतर से जीतकर सबसे बड़े अंतर का कीर्तिमान स्थापित करने में कामयाब रहा. यह महाराष्ट्र में किसी भी सांसद की जीत की सबसे बड़ी मार्जिन थी. सातवें यानी गत वर्ष के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने क्षेत्र के पांच लाख मराठी वोट पर नजर गड़ाते हुए अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को उतारा. इससे पहले कांग्रेस ने यही दाव राम नाईक के सामने अभिनेता गोविंदा को उतारकर खेला था और सफल भी रहे थे. मेरे लिए सर्वाधिक संतोषप्रद यही रहा कि स्टार वैल्यू और इतने दुष्प्रचार के बावजूद मैं 2014 से भी अधिक मार्जिन से विजयी रहा. राज्य भर में हर संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या बढ़ी लेकिन मेर क्षेत्र में डेढ़ लाख मतदाता ना जाने कैसे कम होने के बावजूद मतदाताओं के प्यार से मैं प्रचंड अंतर से जीता ही नहीं बल्कि अपने ही रेकॉर्ड को बेहतर कर सका.

मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त करने की आपकी योजना क्या है ?

गोपाल शेट्टी :  हर सरकार और प्रधानमंत्री मुंबई में लोकॉस्ट हाउसिंग की बातें करते रहे हैं लेकिन नरेंद्र मोदी एक ऐसे पीएम हैं जिन्होंने इसे कर दिखाया है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जा कर देखिए हर कस्बे, छोटे शहर से लेकर मेट्रोपॉलिटन सिटी तक निर्माण कार्य जारी है और इसका फायदा लोगों को मिल रहा है. 2022 में जब हम गांधी जी की 150वीं वर्षगांठ बनाएंगे तब तक देशभर में यह योजना बहुत बड़े स्केल तक पहुंच चुकी होगी. मेरे प्रस्ताव पर ऐसी योजना मूर्तरूप ले रही है जिसमें मुंबई शहर के हर झोपडाधारक को 300 फीट का घर 30 या 35 लाख रूपए में आसानी से मिल सकेगा. इससे वह आसानी से होम लोन लेकर अपना सपना पूरा कर सकेगा. किसी को भी खतरे की तलवार में रहना पसंद नहीं होता. अगर सरकार की योजनाएं सफल रहतीं तो दशकों से इस तरह झोपड़े नहीं बनते रहते। अगले 10 सालों में सीएम फ्री मुंबई करना ही पड़ेगा इस देश में मुफ्त की कोई इज्जत नहीं होती और ऐसी हर योजना भ्रष्टाचार को जन्म ही देती है. अब तक हम सबने यही देखा है.

? अपने परिवार के बारे में कुछ बताएंगे ?

गोपाल शेट्टी : मेरी पत्नी उषा एक साधारण गृहिणी हैं जो राजनीति में कोई विशेष दखल नहीं रखतीं लेकिन मेरे हर चुनाव में बेहद सक्रिय रहती हैं. एक डायमेकर से सांसद तक के मेरे सफर में उनका सबसे बड़ा योग रहा है जिन्होंने मेरे हर फैसले में मेरा साथ दिया और उसी वजह से मैं यहां तक पहुंच सका हूं. मेरे पिता फोर्थ क्लास एम्पलाई थे जिन्होंने मेरी बड़ी बहन की शादी करने के लिए इसलिए नौकरी छोड़ दी जिससे वे उस फंड के पैसे से शादी कर सकें. मैंने अपनी शुरूआत टर्नर/फीटर के अप्रेंटिस का काम सीखते हुए की. बाद में आगे चलकर डाय का छोटा सा एक वर्कशॉप शुरू किया लेकिन राजनीति में आने के बाद मुझे वह सबकुछ समेट देना पड़ा. मैंने गरीबी को बेहद करीब से देखा है और इसी गरीबी के कारण मैं तो बहुत नहीं पढ़ पाया लेकिन शिक्षा का महत्व मुझे पता है इसलिए मैंने बेटे को पूरी छूट दी कि वह जितना पढ़ना चाहे वह पढ़े. 1981 के दौरान मेरी मुफलीसी के दिनों में पैदा हुए मेरे एकमात्र बेटे राकेश का खुद का होटल व्यवसाय है और उसकी राजनीति में कोई रूचि नहीं है. मेरी एक बेटी ज्योति है. मेरे दोनों बच्चों की शादी हो चुकी है और उन दोनों के घर में एक-एक लड़कियां हैं जो मेरे लिए स्ट्रेस रीलिवर का काम करती हैं जब उनके साथ खेलता हूं.

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