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धरोहर से Happening place तक का नजारा दुबई में

This picture taken on July 8, 2020 shows an aerial view of the Burj al-Arab hotel in the Gulf emirate of Dubai, during a government-organised helicopter tour. (Photo by KARIM SAHIB / AFP) (Photo by KARIM SAHIB/AFP via Getty Images)

विश्व मानचित्र पर दुबई की अहमियत एक ऐसे मुल्क के रूप में है जो एक ओर आधुनिकता का जामा ओढ़े हुए है तो दूसरी ओर अपनी प्राचीन संस्कृति व ऐतिहासिक धरोहरों को अपनेआप में समेटे हुए है. यही वजह है कि यह मुल्क आज पर्यटकों का पसंदीदा स्थल बन गया है.

हराभरा, आकर्षणों से भरपूर दुबई, जो कुछ सालों तक शून्यता से भर गया था, बेकारी की दर जहां दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी, लोग नौकरियां छोड़ कर वापस आ रहे थे, कई लोग अपनी गाड़ी में ही रात गुजारते थे, किसी को कुछ रुपए दे कर उस के घर में नहाधो कर फिर से अपने काम में लग जाते थे, वही दुबई आज फिर से शेख मोहम्मद साहब के अथक परिश्रम व दूरदर्शिता से बुलंदी पर पहुंच गया है. आज दुबई का हाल यह है कि वह अपने ही बनाए आंकड़ों को चुनौती दे कर आगे बढ़ रहा है. इस में कोई शक नहीं कि विश्वभर के लोगों का आकर्षण पहले भी दुबई था और आज भी है.

सौजन्य: गूगल

दर्शनीय स्थल

दुबई में आने वाले हर सैलानी को बर्फानी स्थल देख कर सुकून मिलता है. इमरेट्स औफ भौरा के अंदर के इस बर्फीले स्थल में पहुंच कर सैलानी को कुछ पल के लिए ऐसा महसूस होता है कि वह या तो कश्मीर के गुलमर्ग क्षेत्र में पहुंच गया है या फिर स्विट्जरलैंड. इस बर्फानी स्थल में जाने के लिए विशेष कपड़े, टोपी इत्यादि पहनने पड़ते हैं. वहां पर अकसर कई लोग छोटेमोटे कार्यक्रम जैसे जन्मदिन या छोटीमोटी पार्टी आदि भी करते हैं. स्केटिंग का लुत्फ भी वहां उठाया जाता है.

समुद्र में बने होटल बुर्ज अरब के 27वें फ्लोर पर जा कर सैलानी पूरे दुबई को देखने के साथसाथ वहां की साजसज्जा व विभिन्न कार्यक्रम देख कर आनंद महसूस करता है.

उम अल्क्वेन

उम अल्क्वेन में हर उम्र के लोगों के लिए खेल हैं. पानी में तरहतरह के खेलों का आनंद बच्चे, बूढ़े और जवान जीभर कर उठाते हैं. हर पानी के खेल में सिक्योरिटी वाले खड़े रहते हैं. इन खेलों में सलवारकुरता या साड़ी पहन कर जाना मना है. कोई भी सैलानी जिस्म से चिपकी टीशर्ट, जींस या हाफ पैंट पहन कर ही इन खेलों में शामिल हो सकता है.

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आभूषणों की मंडी  : दुबई में आने वाले हर सैलानी को डेरा दुबई और गोल्ड सूक में सोने के आभूषणों की मंडी आकर्षित करती है. कई पर्यटक इसे देखते ही रह जाते हैं.

दुबई में आधुनिक से आधुनिक व कई देशों के बने डिजाइनों के आभूषण उपलब्ध हैं. अमेरिकी हो या अफगानी, बंगाली हो या राजस्थानी, यहां सभी को अपनी रुचि के अनुसार आभूषण मिल जाते हैं.

दुबई के सोने की विशेषता है कि सैलानी को खरा सोना निर्धारित दाम में मिलता है. वहां 22 कैरट का सोना एकदम 100 फीसदी 22 कैरट का होता है, कोई मिलावट नहीं होती जबकि अन्य देशों में सोने के साथ अमूमन तांबा या अन्य कोई धातु मिलाई जाती है.

दुबई में सोने के आभूषण खरीदते समय यदि सैलानी आभूषण की बनवाई पर मोलभाव करे तो उसे फायदा हो सकता है. हालांकि वहां मोलभाव का प्रचलन नहीं है फिर भी दुकानदार ग्राहक को बनवाई में थोड़ाबहुत कम कर देते हैं.

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भव्य मौलों का शहर : दुबई में एक से एक बड़े और भव्य मौल हैं. ‘मौल औफ अमीरात’ सब से बड़ा मौल है. इस के अलावा बरजुमान, लैम्सी प्लाजा, बुर्ज खलीफा, अजमान आदि में अनेक भव्य मौल बने हुए हैं, जहां आप को दुनिया के हर ब्रैंड का कपड़ा व चीजें मिलेंगी, पुरुषों के सूट यों तो रेडीमेड मिल जाते हैं पर और्डर देने पर 3 घंटे में भी तैयार कर दिए जाते हैं. मेकअप का सामान हो या घरगृहस्थी का, घड़ी हो या चप्पल या फिर पर्स, हर ब्रैंड का सामान यहां मिलता है.

मौल्स के अतिरिक्त कुछ ऐसे बाजार भी हैं जहां सस्ता व हर तरह का सामान हर तबके का व्यक्ति खरीद सकता है. जैसे डेरा दुबई इलाके के ऊंट बाजार में बच्चों के कपड़े, खिलौने, महिलाओं के मेकअप का सामान, पर्स आदि सस्ते दामों में मिल जाते हैं. डेरा बाजार में कपड़ों का बाजार है जहां होलसेल और रिटेल दोनों दामों पर कपड़े मिलते हैं.

चाइनीज मार्केट में चीन का बना छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा हर तरह का सामान मिलता है, इन का मूल्य भी कम होता है. ‘केअरफोर’ यहां का बहुत बड़ा मौल है जहां खानापीना, कपड़ा, घर का सामान, घड़ी, सोना सभीकुछ मिलता है.

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ओपन बस का मजा : दुबई में ‘ओपन बस’ में बैठ कर आप पूरे शहर के पर्यटन स्थल घूम सकते हैं. इस बस के कई स्टौप हैं. आप किसी भी पर्यटन स्थल पर उतर कर अच्छी तरह से घूम कर फिर दूसरी ‘ओपन बस’ ले कर दूसरे पर्यटन स्थल का आनंद ले सकते हैं. टिकट वही रहता है. एक दिन का टिकट दूसरे दिन भी चलता है. जितने पर्यटन स्थलों का विवरण टिकट में लिखा होता है.

यह बस बरजुमान, करामा से शुरू होती है. म्यूजियम, अमीरात, मोल, बुर्ज अरब होटल, अरब के पुराने मकान, सब से लंबी बिल्ंिडग, जुमेरा आदि कई स्थलों से घुमाते हुए ले जाती है.

दुबई में ट्रांसपोर्ट के लिए आप कार्ड भी बनवा सकते हैं. यह ट्रांसपोर्ट कार्ड, बस या मैट्रो दोनों में चल जाता है.

मछलियों की दुनिया : दुबई की सब से ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा देखने लायक है. वहां ऊपर जाने में टिकट लगता है. वहां के हर फ्लोर पर आकर्षण के कई केंद्र हैं. उस के साथ ही मछलियों का ऐसा म्यूजियम है जहां हर तरह की व कुछ विशेष आकर्षण से युक्त मछलियां हैं, जिन्हें देख कर बच्चे ही नहीं, बड़े भी आनंदित होते हैं.

बिना ड्राइवर मैट्रो : दुबई की मैट्रो बिना चालक के औटोमेटिक चलती है. पूरे शहर में मैट्रो का जाल बिछा हुआ है. इस का किराया भी साधारण है. एक डब्बा प्रथम श्रेणी का होता है जिस में थोड़ा ज्यादा किराया होता है. हवाई जहाज की शक्ल की यह मैट्रो आकर्षण के साथसाथ सैलानियों को आनंदित भी करती है.

बालू के पहाड़ों में रोमांचक सफारी : दुबई में सफारी डेजर्ट का भी अपना अलग रोमांच है. पजेरो जैसी गाडि़यों में ड्राइवर बालू के विशाल पहाड़ों पर सैलानियों को ले जाते हैं. 3-4 घंटे की इस सवारी के समय वहीं पर खानापीना व अरबी नृत्यांगनाओं का नृत्य देखते हैं. खाने के साथसाथ जाम के दौर का भी प्रबंध होता है. नृत्यांगना बैली डांस करती हैं. कई सैलानी भी इन के साथ नृत्य करते हैं.

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समुद्र में नौका विहार : दुबई में रात में ज्यादातर बड़ीबड़ी बोटों को सजाया जाता है. इस पर कई सैलानी दूर समुद्र की सैर करने के साथसाथ वहीं खानापीना भी करते हैं. डांस आदि के कार्यक्रम भी चल रहे होते हैं. समुद्र में इस तरह की कई बोटें चल रही होती हैं जो बहुत आकर्षित करती हैं. कई लोग इन्हीं बोटों पर जन्मदिन की पार्टियां आदि भी आयोजित करते हैं.

खूबसूरत इमारतों का शहर : दुबई में एक से एक खूबसूरत इमारतें हैं. पहलेपहल यहां मकान या फ्लैट खरीदना सिर्फ बड़े आदमियों की मिल्कीयत थी लेकिन अब कुछ दाम कम हो जाने के कारण कई लोगों ने एक कमरे का फ्लैट या 2 बैडरूम फ्लैट खरीद रखे हैं, जिस के लिए उन को वीजा भी मिलता है.

कैसे जाएं : दुबई जाने के लिए  अमीरात एअर लाइंस तो हमेशा से वीजा देती रही है. अब अन्य एअर लाइंस ने भी देना शुरू किया है. इस के अतिरिक्त दिल्ली, मुंबई में ऐंबैसी से भी वीजा प्राप्त किया जा सकता है. कई ट्रैवल एजेंट भी टिकट और वीजा मुहैया करा देते हैं.

मौसम : दुबई का मौसम यों तो ठीक ही रहता है लेकिन गरमियों में जून से ले कर अगस्त के आखिर तक बहुत गरमी होती है. बाकी समय खुशगवार मौसम रहता है.

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सागर में बसती है दुबई की आत्मा

शहर इस तरह बसाया गया है कि आप हर कोने से समुद्र को महसूस कर सकते हैं। दुबई अरेबियन रेगिस्तान के भीतर है। रेतीय टीलों का एक विशाल समुद्र दक्षिणी दुबई में फैला हुआ है। दक्षिण में अबू धाबी, पूर्वोत्तर में शारजहाँ और दक्षिण पूर्व में ओमान सल्तनत है। दुबई को लोग उसकी भव्यता के लिए जानते हैं पर दुबई की आत्मा सागर में बसती है। फूलों के घने दरख्त, हरी घास, खजूर के पेड़ और समुद्र की लहरें, हर चीज जगमगाती है। 

खुला समाज

आपको अंदाज़ लगाना मुश्किल होगा कि यह मुल्क अरबी लोगों का है या हिन्दुस्तानियों का या पाकिस्तानियों का। दिलचस्प बात यह है कि दुबई में अरबी लोगों से ज़्यादा बड़ी आबादी हिन्दुस्तान व पाकिस्तान की है। इस्लामिक देश होने के बावजूद यहां का समाज खुला है। औरतें मस्जिद में जाती हैं। काम करती हैं। ये बात आपको हैरान कर सकती है कि शराब को हराम मानने वाले इस्लामिक देश में कई बार है जहां खूब शराब परोसी जाती है। दूसरी ओर एफएम रेडियो पर नमाज़ के वक़्त गाने रोक कर अजान सुनाते हैं।[2] 

दुबई संग्रहालय

दुबई के इतिहास को अगर जानना है तो वहां के संग्रहालय को देखना चाहिये। यह संग्रहालय दुबई की सबसे पुरानी इमारत है। जिसे अल फ़हिदी के नाम से जाना जाता है, जिसका निर्माण 1799 में किया गया। अब यह दुबई संग्रहालय का हिस्सा है। 

कला और संस्कृति

पूर्वी अरब प्रायदीप की इस्लाम से पूर्व की संस्कृति के बारे में काफ़ी कम जानकारी मिलती है पर उस संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है नृत्य और संगीत। इतिहास बताता है कि रेतीले इलाक़ों में भी उनका जीवन संगीतमय था। वे नाचने के लिए घुंघरु की जगह पर बकरी के खुर का इस्तेमाल करते थे। मर्द उसे कमर में बांध कर नाचा करते थे। संग्रहालय में ऐसे कई अवशेष मिले हैं जिससे यह साबित होता है कि दुबई मोती के व्यापार में काफ़ी आगे था। 1930 तक दुबई मोती निर्यात के लिए जाना जाता था। मोती निकालने के लिए मज़दूरों के पांव में रस्सी बांध कर और उनकी नाक में क्लीप लगा कर उन्हें समुद्र में फेंक दिया जाता था। तीन मिनट के बाद उन्हें रस्सी के सहारे बाहर निकाला जाता था। उसी तीन मिनट में वे समुद्र से सीप चुनते थे।[2] 

वैभवशाली शहर

दुबई हमेशा से भारतीयों के लिए शानो-शौकत व बेशुमार दौलत की जगह के रूप में रहा है। दुनिया में वैभवशाली शहरों का कोई प्रतिमान ढूंढना हो तो दुबई से बेहतर कोई नहीं। तेल की अकूत संपदा ने वहां हर वो चीज़ ला खड़ी की है जिसकी कल्पना की जा सकती है। इसीलिए जब दुनिया घूमने की बात होती है तो उसमें दुबई सबसे ऊपर होता है। हरियाली की कमी होने के बावजूद रेगिस्तान के इस शहर को धरती का जन्नत कहा जा सकता है। आज दुबई के पास दुनिया के सबसे ऊंचे और सर्वाधिक कमरों वाले होटल हैं। इसके अलावा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा (829.84 मीटर) और दुबई शापिंग माल उसकी शोहरत में चार चांद लगाने के लिए काफ़ी हैं। दुबई माल सहित पूरे दुबई में कुल सत्तर शापिंग माल है जो दुनिया के किसी मुल्क के इक्का-दुक्का शहरों में ही हैं। आलम यह है कि यहां पूरे सालभर विदेशी पर्यटकों की भरमार रहती है। तेज भागती कारों के बीच भी यह शहर इतना शांत रहता है कि पर्यटकों की छुट्टियां कब बीत जाती हैं उन्हें पता ही नहीं चलता। 

कैसे जाएं

खाड़ी के देशों में भारतीयों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की वजह से दुबई उन जगहों में से है जहां के लिए भारतीय शहरों से सबसे ज़्यादा उड़ानें हैं। ख़ाली दिल्ली से ही दुबई के लिए रोज़ाना कम से कम दस सीधी उड़ान हैं। सफर लगभग पौने चार घंटे का है। इसी तरह भारत के कई अन्य महानगरों से दुबई के लिए उड़ानें हैं।[3] 

दुबई मेट्रो

दुबई मेट्रो गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गयी है। मेट्रो ने बिना ड्राइवर वाले मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 74.695 किलोमीटर तक कर लिया है जो विश्व रिकॉर्ड है। इससे पहले भी यह रिकॉर्ड दुबई मेट्रो रेड लाइन के नाम था। उसने सितंबर 2011 में बिना ड्राइवर वाले लाइन को बढ़ा कर 52 किलोमीटर कर लिया था। दुबई मेट्रो में रेड लाइन और ग्रीन लाइन शामिल हैं। दुबई के सड़क एवं परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के कार्यकारी चेयरमैन मत्तार अल तायेर ने पश्चिम ऐशिया में गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के क्षेत्रीय निदेशक तलाल उमर से रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।[4] 

दुबई के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी

  • संयुक्त अरब अमीरात 7 शहरों से मिलकर बना है और उन्हीं में से एक शहर है दुबई।
  • दुनिया की सबसे ऊँची मानी जाने वाली इमारत ‘बुर्ज दुबई’ यहाँ है। इसमें 164 फ्लोर हैं और लंबाई लगभग 800 मीटर है।
  • यहाँ लेफ्ट हेंड ड्राइव है। सभी चालक सड़क के दाहिनी ओर से चलते हैं।
  • यहाँ पेट्रोल गेलन से मिलता है। भारतीय रुपए के अनुसार क़रीब 15 रुपए लीटर।
  • 09-09-2009 को यहाँ मेट्रो ट्रेन सेवा की शुरुआत हुई।
  • यहाँ पुरुष के लिए ‘शेख’ और महिला के लिए ‘शेखा’ का उपयोग नाम के पहले किया जाता है।
  • यहाँ की सड़कों पर केवल कार ही दिखती हैं। इक्का दुक्का बाइक सवार या तो पेपर बाँटने वाले हॉकर होते हैं या फूड डिलीवर करने वाले।
  • यहाँ पानी से ज़्यादा सस्ती कोल्ड्रिंक पड़ती है।
  • दुबई में गर्मी काफ़ी पड़ती है। सितंबर-अक्टूबर में यहाँ का तापमान 38 से 42 डिग्री तक चला जाता है। यहाँ प्रत्येक इमारत, कार, बस में एयरकंडीशनर होता है। यहाँ तक कि सड़कों पर बने बस स्टॉप भी एयरकंडीशंड होते हैं। 

पैदल चलने वालों को प्राथमिकता 

दुबई में बाज़ारों को छोड़ दें तो मुख्य मार्गों पर इक्का-दुक्का पैदल यात्री दिखाई देते हैं। बावजूद इसके उनके लिए ट्रैफिक नियमों में काफ़ी आसानी है। हर जेब्रा क्रॉसिंग से पहले एक स्विच लगा है जिसे दबाकर मुख्य मार्ग के ट्रैफिक को रोका जा सकता है। सड़क पार करने के बाद स्विच दबाकर उस मार्ग पर ग्रीन सिग्नल पुनः चालू किया जा सकता है। 

नौकरी मिलना आसान, लाइसेंस नहीं 

कहा जाता है कि दुबई में नौकरी मिलना आसान है लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस नहीं। यहाँ हर तीन साल में लाइसेंस रिन्यू करवाना पड़ता है। पहली बार लाइसेंस लेने में बहुत से टेस्ट और शुल्क देना होता है। यदि आप गाड़ी ख़रीदने जा रहे हैं तो लाइसेंस होना बेहद जरूरी है। बिना लाइसेंस के शोरूम मैनेजर गाड़ी की टेस्ट ड्राइव भी नहीं देता। 

कोई हॉर्न नहीं बजाता 

दुबई में किसी का हॉर्न बजाना आगे चल रहे चालक को गाली समान लगता है। सभी इतने व्यवस्थित चलते हैं कि हॉर्न बजाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस कारण यहाँ सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता। 

प्री पेड टोल टैक्स 

यहाँ आपकी गाड़ी पर प्री पेड टोल टैक्स का कार्ड लगा होना जरूरी है। कई रास्तों पर टोल टैक्स बार लगे हुए हैं। जब भी आपकी गाड़ी उनके नीचे से गुजरेगी, स्वतः ही उस कार्ड में से दो या चार दिरहम (1 दिरहम 14 भारतीय रुपए के लगभग) कम होता जाता है। यदि प्री पेड कार्ड नहीं है तो इससे पचास गुना ज़्यादा की राशि का चालान बन जाता है। प्रत्येक सड़क पर वाहन चालकों के लिए स्पीड निर्धारित है। स्पीड कम या ज़्यादा होने पर कैमरे और चालानी राशि आपके इंतज़ार में रहती है। 

हज़ारों रुपए की चालानी कार्रवाई 

यहाँ ट्रैफिक को लेकर काफ़ी सख्ती है। कोई भी वाहन चालक नियम तोड़ने में घबराता है। पुलिस कहीं नजर नहीं आती, हर जगह कैमरे लगे हैं। जहाँ नियम तोड़ा वहाँ के फोटो, समय के साथ, क्या गलती की उसका चालान आपके घर पहुँच जाता है। साल के अंत में ऐसे सारे चालानों को भरना जरूरी होता है वरना आगे वाहन चलाने के लिए एनओसी नहीं मिलती। यह चालानी राशि चंद रुपयों में नहीं होती बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों की कई महीनों की तनख्वाह तक पहुँच जाती है। 

ज़मीन को अदब 

दुबई में आपको इधर-उधर थूकते लोग नहीं दिखेंगे। यह सिर्फ साफ-सफाई बनाए रखने के लिए नहीं है बल्कि यहाँ के नियमों में ही है। साठ के दशक में यहाँ की जमीन में तेल की खोज की गई थी, तभी से यहाँ जमीन को अदब देने के लिए उस पर कोई थूकता या गंदगी नहीं करता। दुबईवासियों का मानना है कि इस तेल के कारण ही तो दुबई इस ऊँचाई पर है। इसका सम्मान तो हर पल किया जाना चाहिए। 

दुबई में हैं अनेक भारतीय 

यहाँ भारत के लोग बहुतायत में हैं। किसी भी टैक्सी में बैठ जाएँ, ड्राइवर हिन्दी बोलता है। किसी भी होटल में चले जाएँ, वेटर को हिन्दी आती है और किसी भी शॉपकीपर या उसके हेल्पर को हिन्दी बोलते देखा जा सकता है। ज़्यादातर भारतीय यहाँ किसी उच्च पद पर काम नहीं करते लेकिन पगार भारत के रईसों जैसी पाते हैं। वैसे कई भारतीय यहाँ अपना बिजनेस कर रहे हैं और कई अपनी प्रतिभा के बल पर दुबई वासियों को मोहित कर रहे हैं। इसके अलावा यहाँ पाकिस्तान, फिलीपींस और मलेशिया के लोगों की संख्या भी कम नहीं।[5] 

दुबई की खूबसूरती ने हमेशा से ही पर्यटकों को आकर्षित किया है। अब दुबई की नजर भारतीय पर्यटकों, खासकर चंडीगढ़, नागपुर और कोयम्बटूर जैसे शहरों के पर्यटकों पर लगी है।

भारत में दुबई पर्यटन विभाग के निदेशक कार्ल वाज ने कहा कि दुबई में भारतीय पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी से वे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और दूसरे दर्जे के शहरों के लोगों की खर्च क्षमता में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे लोग छुट्टियां मनाने के लिए विदेश जाना पसंद करने लगे हैं।

वाज का कहना है, “महानगरों के लोग पहले से ही विदेश दौरे के शौकीन रहे हैं, लेकिन छोटे और मझोले शहरों के लोग इसके बारे में कम जागरुक रहे हैं। ऐसे में हमें इन छोटे शहरों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।”

दुबई का प्रचार करने के लिए रोड शो और प्रदर्शनियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा कई और लोक लुभावन पैकेज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मसलन, लोगों को ‘सिनेमा देखो और दुबई का मुफ्त टिकट हासिल करो’, मैकडॉनल्ड में ‘हैप्पी मील का लुत्फ उठाएं और दुबई जाएं’ जैसे ऑफर उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, “हमने दुबई को प्रोत्साहित करने के लिए नेशनल ज्योग्राफिक के साथ भी गठजोड़ किया है। टूर और ट्रैवल संचालकों को गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारत से दुबई यात्रा का औसत होलीडे पैकेज 50 हजार रुपए प्रति युगल उपलब्ध है जिसमें तीन रात ठहरने की सुविधा उपलब्ध है। इसमें विमानों के किराए, चार सितारा होटल में ठहरने, शिप क्रूज और शहर की यात्रा जैसी सुविधाएं शामिल हैं।”

दुबई भारतीय पर्यटकों की नजर में सर्वाधिक पसंदीदा पर्यटन केंद्र बनने की कोशिश में है। इस बारे में वाज ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए, “हर साल करीब 3.98 लाख भारतीय पर्यटक दुबई की यात्रा करते हैं। इसमें वे भारतीय शामिल नहीं हैं जो रोजगार के लिए दुबई जाते हैं। हम चाहते हैं कि इस साल के अंत तक इस संख्या में और 32 हजार का इजाफा हो और संख्या 4.30 लाख के बिदु को छू जाए।”

उन्होंने कहा कि अभी भी दुबई आने वाले पर्यटकों में भारतीयों की तादाद कम है। दुबई आने वाले कुल पर्यटकों में भारतीयों की तादाद महज 6.3 फीसदी है। वाज बताते हैं, “दुबई में भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए हम चंडीगढ़, नागपुर, कोयम्बटूर जैसे दूसरे दर्जे के देशों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।” 

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