All India News

जगमगाते बनारस की छवि दुनिया में किसी से कम नहीं

जगमगाते बनारस की छवि दुनिया में किसी से कम नहीं

सौजन्य: यूट्यूब

बनारस से विश्वनाथ गोकर्ण

अंधेर नगरी चौपट राजा : खबर है कि काशी के चौरासी घाटों पर शिलापट्ट लगा कर उन पर घाटों का संक्षेप इतिहास लिखा जाएगा। इस इतिहास को लिखने की जिम्मेदारी काशी के किसी जानकार को न देकर नोएडा की किसी एजेंसी को दे दिया गया। ये एजेंसी लाइट एंड साउंड का शो बनाने का काम करती है। इस एजेंसी वालों ने कंटेंट लिखने के लिए बनारस के घाटों के बारे में जानने के वास्ते पहले तो जेएनयू की लाइब्रेरी छानी। जब वहां कुछ नहीं मिला तो तमाम ब्लॉगर्स से संपर्क किया। उनसे भी बात नहीं बनी। तब किसी एक शख्स ने उन्हें कुछ इबारत अंग्रेजी में लिख कर दे दी। उसने जो भी उल्टा सीधा लिख कर दिया उसे वाराणसी नगर निगम की बनाई गई कमेटी ने पास कर दिया।

इस कमेटी में मेधावी आईएएस नगरायुक्त, BHU के एक स्वनामधन्य प्रोफेसर, पुरातत्व विभाग के एक बहुत बड़े अफसर भी हैं। जाहिर है विद्वानों का जमावड़ा है। विद्वत कमेटी ने एजेंसी से मैटर हिंदी में भी लिखने को कहा। अब हिंदी में कौन लिखे। फिर एक ब्लॉगर हाथ लगा। उसने अंग्रेजी को गूगल बाबा के पास भेजा। जो हिन्दी निकला उसे एजेंसी को पकड़ा दिया। करोड़ों का ठेका था। पैसा पास होता गया और सबको मिलता गया। किसीने आग्रह पूर्वक गूगल बाबा का अनुवाद मुझे पढ़ने दिया। तमाम घाटों की कथा में जो गलतियां दिखीं वो तो थी ही लेकिन तुलसी घाट की कथा पढ़ कर बड़ी शर्मिंदगी हुई। तुलसी घाट की कथा में नाग नथैया का जिक्र भी था। अंग्रेजी में नाग नथैया ठीक था। नाग नथैया के हिंदी अनुवाद को ब्रेकेट में नग थैया यानी नग्न नृत्य या सर्प नृत्य लिखा था।

यहां सवाल यह नहीं है कि गूगल बाबा को हिंदी कितनी आती है। सवाल यह है कि क्या विद्वानों कि कमेटी को बनारस की पच्चीस लाख की आबादी में घाट का जानकार कोई लिखने वाला नहीं मिला ? क्या बनारस को ओढ़ने बिछाने वाले सब मर गए जो नोएडा की किसी निकम्मी एजेंसी को ऐसा महत्वपूर्ण काम सौंप दिया गया ? क्या प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में भी ऐसी अंधेरगर्दी हो रही है ? क्या शासन और प्रशासन को अपना इतिहास या परंपराओं की कोई जानकारी नहीं है ? क्या वह अपनी धरोहर को संजोने के प्रति जरा भी संवेदनशील नहीं है ? क्या इस कमेटी के स्वनामधन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है ?

सौजन्य: सभी फोटो गूगल से

क्या इस तरह की चार सौ बीसी के खिलाफ आवाज नहीं उठनी चाहिए ? देखिए काशी के तथाकथित विकास से जुड़े सारे मसले या ठेके जब तक बाहर की एजेंसियों के हाथ जाते रहेंगे तब तक इस शहर की व्यवस्था ऐसे ही चौपट रहेगी। थू है ऐसी कमेटी और ऐसे विद्वानों पर। जागो बनारस जागो… आने वाली पीढ़ियों को अपना सच्चा इतिहास बताओ… आज अगर हम नहीं जागे तो कल आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी… जागो बनारस जागो….

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *